Lal Kitab - Ancestral Debt

Posted by admin 08/03/2016 0 Comment(s) Astrology,

जिस प्रकार हम अपने पूर्वजों व माता पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी होते हैं उसी प्रकार ही उनके द्वारा किए गए कर्मों के भी उत्तराधिकारी बनते हैं. यदि उनके कर्म अच्छे हैं तो उन के अच्छे फलों के उत्तराधिकारी हम बनेंगे और यदि कहीं कोई नैतिक रुप से गलत कार्य हुआ है तो उसके परिणाम के उत्तराधिकारी भी हम बनते हैं.  ये नकारात्मक कार्य नकारात्मक फ़ल देते हैं जिसके फ़लस्वरूप हमारे  जीवन में भी बहुत कष्ट आते हैं. इसे पैतृक ऋण कहा जाता है.

 

ज्योतिष के संदर्भ में पैतृक ऋण बहुत ही महत्वपूर्ण है. लाल किताब पद्धति इसके विशेष परिणामों को रेखांकित किया गया है जिनका विवरण इस प्रकार है:

 

सूर्य से स्व-ऋण

 

लाल किताब के अनुसार जब किसी की कुण्डली में शुक्र, शनि, राहु या केतु पाँचवें भाव में स्थित हों, तो जातक स्वयं के ऋण से पीडित माना जाता।

 

कारण: नास्तिक होना, प्राचीन परंपराओं का अपमान करना.

 

संकेत: घर में कोई भूमिगत अग्निकुंड या छत में एक प्रकाश के लिए मार्ग बना होगा.

 

परिणाम: इस ऋण के परिणाम स्वरुप मुकदमें, हृदय रोग, कमजोर स्वास्थ्य, व्यर्थ का संघर्ष और निर्दोष होते हुए भी दंड पाने वाली परिस्थितियां बन जाती हैं.

 

उपाय:  कुटुंब के सभी सदस्यों से समान मात्रा में राशि लेकर उस से एक संयुक्त यज्ञ कराना चाहिए जिससे इस ऋण से मुक्ति मिलेगी.

 

चंद्रमा का मातृ ऋण

 

लाल किताब के अनुसार जब केतू कुण्डली के चौथे भाव में हो तो कुण्डली को मातृ ऋण से प्रभावित या ग्रसित माना जाता है।

 

कारण: पूर्वजों ने किसी मां को उपेक्षित किया हो या उसके साथ अत्याचार किया हो अथवा बच्चे के जन्म के बाद मां को उसके बच्चे से दूर रखा हो, या हो सकता है कि किसी माँ की उदासी को अनदेखा किया हो।

 

संकेत: पास के कुंए या नदी की पूजा करने के बजाय उसे गंदगी और कचरा डालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा होगा।

 

परिणाम: व्यक्ति माता-पिता के प्रति लापरवाह रहता है, उनके दुख सुख का ध्यान नहीं रखता है. बहुत प्रयास करने के बाद भी सफलता हाथ में नहीं लगती.

 

उपाय: कुटुंब के सभी सदस्यों से समान मात्रा में राशि लेकर उसकी चांदी ख़रीदकर एक ही दिन बहते पानी में प्रवाहित करने से इस ऋण से मुक्ति मिलती है

 

मंगल से सम्बंधी ऋण

 

यदि जन्मकुंडली के पहले वह आठवें भाव में बुध, केतु दोनों ग्रह एक साथ या अकेले भी उपस्थित हों तो कुण्डली को सम्बंधी-ऋण से ग्रसित माना जाता है.

 

कारण: पूर्वजों ने किसी की फसल या घर में आग लगाई हो, किसी को जहर दिया हो अथवा किसी की गर्भवती भैंस को मार डाला हो.

 

संकेत: घर में किसी उत्सव के समय अपने परिवार से दूर रहना अथवा रिश्तेदारों से न मिलना इस दोष के संकेतक हैं.

 

परिणाम: जीवन में हर प्रकार की सफलता मिलती है सुख समृद्धि मिलती है और फिर अचानक यह सब कुछ समाप्त हो जाता है, और दुख इतने अधिक आते हैं जैसे आगे कोई राह नहीं बची हो. यह विशेषकर 28 से 36 वर्ष के मध्य में होता है.

 

उपाय: इसके उपाय के लिए सभी सदस्यों से धनराशि समान मात्रा में इकट्ठा करके और किसी वैद्य का कार्य करने वाले व्यक्ति को दान दें.

 

बुध से बहन/पुत्री ऋण

 

जब चन्द्रमा कुण्डली के तीसरे या छठे भाव में हो, तो जातक को बहन/पुत्री ऋण से पीडित माना जाता है।

 

कारण: पूर्वजों के द्वारा किसी की बहन या बेटी की हत्या की गई होगी, उसे युवावस्था में धोखा दिया होगा या उन्हें बेहद परेशान किया गया होगा.

 

संकेत: किसी को धोखा देना, कम आयु के बच्चों को उठाकर लालच वश उनको बदल देना या बेच देना.

 

परिणाम: इस से 48 वर्ष की आयु तक जीवन में संघर्ष बना रह सकता है. कोई भी सहायता करने वाले व्यक्ति आसपास दिखाई ना दे. 

 

उपाय: सारे सम्बंधी पीले रंग की कौड़ियाँ खरीद कर, एक जगह इकट्ठी करके जलाकर राख कर दें और उस राख को उसी दिन जल में प्रवाहित कर दें.

 

बृहस्पति से पितृ ऋण

 

जब किसी कुण्डली में शुक्र, बुध या राहू दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में हों तो जातक पितॄ ऋण से पीडित होता है.

 

कारण: किसी ने संतान या अन्य कारण से कुटुंब के कुल पुरोहित को बदल दिया गया होगा या किसी धर्म स्थान का अपमान किया गया हो.

 

संकेत: घर के पास में किसी मंदिर में तोड फोड हुई होगी या कोई पीपल का पेट काटा गया होगा.

 

परिणाम: सर्वाधिक दुष्परिणाम घर की आर्थिक स्थिति पर आता है.

 

उपाय: कुटुंब के प्रत्येक सदस्य को एक-एक पैसा इकट्ठा करके मंदिर में पुजारी को देना चाहिए.

घर के निकटवर्ती मंदिर की देखभाल करनी चाहिए.

 

शुक्र से पत्नी ऋण

 

जन्म कुंडली के दूसरे या सातवें भाव में यदि सूर्य, राहु या चंद्रमा स्थित हो तो स्त्री के कारण ऋण होता है.

 

कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि पूर्वजों या बडे बुजुर्गों नें लालचवश किसी गर्भवती महिला की हत्या कर दी होगी.

 

संकेत: घर गाय न पालने का चलन होगा.

 

परिणाम: कोई भी मांगलिक कार्य हो रहा हो और किसी निकट संबंधी की मृत्यु का समाचार आता हो.

 

उपाय:  कुटुंब के प्रति प्रत्येक सदस्य से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उससे 100 गायों को चारा खिलाएं। यह काम एक ही दिन करना है.

 

शनि का जालिमाना ऋण

 

जब सूर्य, चन्द्रमा, मंगल कुण्डली के दसवें और ग्यारहवें भाव में हो, तो जातक को जालिमाना -ऋण से ग्रसित माना जाता है.

 

कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि पूर्वजों ने किसी से धोखा किया होगा या उसे घर से बाहर निकाल दिया होगा और उस घर का मुल्य नही दिया होगा.

 

संकेत: घर के मुख्य मार्ग दक्षिण में होना, निसंतान होना या निसंतान से भूमि लेकर बनाया हुआ घर होना, मार्ग पर या किसी कुयें पर छत बनाकर घर बनाया होना,

 

परिणाम: कार्यस्थल पर बार-बार आग लग जाना जहां पर बुझाने का प्रबंध ना होना, आग से जले हुए व्यक्ति को अस्पताल ले जाने का साधन ना मिलना इत्यादि.

 

उपाय: अलग-अलग जगह की सौ मछलियों या मज़दूरों को सभी परिजन धन इकट्ठा करके एक दिन में भोजन कराएँ.

 

राहु का ॠण

 

यदि 12वें भाव में सूर्य शुक्र और मंगल यह सभी ग्रह या इनमें से कोई भी हो तो यह अजात-ऋण कहलाता है.

 

कारण: पूर्वजों या पितरों ने ससुराल-पक्ष के लोगों को धोखा दिया होगा या किसी रिश्तेदार के परिवार के विनाश में भूमिका निभाई होगी.

 

संकेत: घर के दक्षिणी दीवार के साथ ही उजड़ा हुआ कब्रिस्तान या कोई भडभूजे की भट्टी हो या दरवाजे के नीचे कोई गंदा नाला बह रहा होगा.

 

परिणाम:  अचानक आग लग जाना, धोखे से धन की हानि होना.

 

उपाय: कुटुंब के सभी सदस्यों से एक-एक नारियल लेकर उन्हें एक जगह इकट्ठा करें और उसी दिन जलप्रवाहित कर दें.

 

केतु का ॠण

 

जब चन्द्रमा, मंगल कुण्डली के छठे भाव में स्थित हों, तो जातक इस कुदरती ऋण से ग्रसित माना जाता है.

 

कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि पूर्वजों या पितरों ने किसी कि संतान को नष्ट करवाया होगा.

 

संकेत:  कुटुंब में लड़का नहीं होना, यदि हो तो रोगी हो जाना.
 

परिणाम: अपना जमा धन यात्राओं के दौरान खो जाना, जो सबसे विश्वास पात्र व्यक्ति हो वही विश्वासघात कर दे, किसी कुत्ते को गोली से मारना, भतीजे से इतना कपट करना कि वह पूरी तरह बर्बाद हो जाय.

 

उपाय:  कुटुंब के सभी सदस्यों से समान धनराशि लेकर 100 कुत्तों को एक ही दिन भोजन कराया जाए

 

अत: व्यक्ति को किसी अनुभवी ज्योतिषी के साथ यह विचार करने के बाद ऋण उतारने का उपाय कर लेना चाहिये.  इससे व्यक्ति एक खुश और समृद्ध जीवन जीने में सक्षम होता है.

Leave a Comment