श्रीशारदाप्रार्थना (Shri Sharda Prayer)

Posted by admin 12/02/2016 1 Comment(s) Astrology,Mantras,

॥ श्रीशारदाप्रार्थना श्रीशङ्कराचार्यविरचिता ॥
(आदि जगतगुरु श्रीमदशंकराचार्य विरचित श्रीशारदा प्रार्थना)
(ADI Jjagtaguru Shrimd Shankaracharya created Shri Sharda Prayer)

 

 

नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि ।
त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे ॥ १॥

नमस्ते सरस्वती देवी मां! हे शारदा दीप्तिमान, कश्मीर शहर में निवास करने वाली, हम हर रोज आपसे प्रार्थना करते हैं, हमें आप शुद्ध ज्ञान प्रदान कीजिये ।

My salutations to Mother Saraswati, who also known as Sharda, who is radiant, who lives in Kashmir in the city to radiant. We pray you everyday. Please bless us with pure knowledge. 

 

या श्रद्धा धारणा मेधा वग्देवी विधिवल्लभा ।
भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी  ॥ २॥

आप विश्वास, स्मृति , बुद्धि , वाणी की दिव्यता , प्रदान करने वाली सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की पत्नी हैं। आप भक्तों की को भाषा की दिव्यता, शांति अन्य विशेष गन प्रदान करने वाली हैं।

You, wife of Brahma (The Creator of Universe), bestow self-belief, memory, intelligence, divinity in voice, and mental peace on your devotees. 

 

नमामि यामिनीं नाथलेखालङ्कृतकुन्तलाम् ।
भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम् ॥ ३॥

मैं आप यामिनी स्वरूपा को जो स्वयं धैर्य का प्रतीक हैं, जिनके केश-कुंतल ज्ञान से सुसज्जित हैं, जो स्वयं भवानी है और जो एक है अमृत ​​की सरिता के भाँती सांसारिक संताप को शांंत करती हैं, साष्टांग प्रणाम करता हूँ।
I prostrate before you who symbolizes patience, whose has hairs decorated with knowledge, who is a form of Bhavani, and who flows like a river filled with nectar that propitiates the earthly sufferings of all. 

 

भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः  ।
वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च ॥ ४॥

आप भद्रकाली स्वरूपा को बारम्बार नमस्कार । हे माँ, आप एक है जो ज्ञान-प्रवाह के रूप में वेद, उपनिषद व्  सीखने के अन्य सभी रूपों में उपस्थित हैं।  
I bow before mother Bhadrakaalii (one who does only good). Oh Mother you exist as knowledge in Vedas, Upanishads and all other forms of learnings. 

 

ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी ।
सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः   ॥ ५॥

प्रणाम करता हूँ आप ब्रम्हस्वरूपा, दिव्य-प्रकाशरुपा, शाश्वत, सभी विद्याओं की स्वामिनी, वाग्देवी को।
I bow before the one who is like Bramha (The Creator of Universe), source of divine light, rules the ability to speak, eternal, and knows all disciplines.

 

यया विना जगत्सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं भवेत् ।
ज्ञानाधिदेवी या तस्यै सरस्वत्यै नमो नमः   ॥ ६॥

प्रणाम करता हूँ ज्ञान की स्वामिनी मां सरस्वती को जिनके (ज्ञान के ) बिना पूरी दुनिया मृत (निरर्थक) होगी।
I bow before Mother Saraswati without whom (without knowledge) the entire world would appear to be dead (redundant).

 

यया विना जगत्सर्वं मूकमुन्मत्तवत्सदा ।
या देवी वागधिष्ठात्री तस्यै वाण्यै नमो नमः  ॥ ७॥

प्रणाम करता हूँ वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती को जिनके बिना पूरी दुनिया मूक व्  उन्नमत्त प्रतीत होती है।

I bow before the presiding deity of Voice, Goddess Saraswati, without whom the whole world appears to be dumb and senseless. 

 

॥ इति श्रीशारदाप्रार्थना श्रीशङ्कराचार्यविरचिता  ॥

1 Comment(s)

sriramreddy:
29/09/2016, 09:02:41 AM
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so nice

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